लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कोचिंग हब में लगी भीषण आग ने एक बार फिर राज्य की चरमरा चुकी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 निर्दोष लोगों की जान चली गई, जिसके बाद पूरे सूबे में हड़कंप मच गया है। सरकार और प्रशासन जो अब तक 'ऑल इज वेल' का राग अलाप रहे थे, वे अचानक से हरकत में आए हैं और राज्यव्यापी औचक निरीक्षण के नाम पर दिखावा शुरू कर दिया गया है।
इस हादसे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने पहले ही नियमों और फायर सेफ्टी मानकों को कड़ाई से लागू कराया होता, तो लखनऊ में यह बड़ा हादसा और मासूमों की मौतें रोकी जा सकती थीं। जनता का आरोप है कि अवैध रूप से बेसमेंट और बिना बिल्डिंग मैप पास कराए चल रहे इन कोचिंग सेंटरों को अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त था। अब हादसा होने के बाद प्रशासन केवल अपनी कमियां छिपाने के लिए आनन-फानन में सेंटरों को सील करने का नाटक कर रहा है।
विपक्ष ने इस मामले में सरकार को घेरते हुए कहा कि यह हादसा प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए। इस बीच, प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि वह हादसे की जांच करेगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच सचमुच निष्पक्ष होगी और क्या दोषियों को真正 सजा मिलेगी?
लखनऊ के कोचिंग हब में लगी आग ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारे शहरों में सुरक्षा व्यवस्था वास्तव में चुस्त-दुरुस्त है? क्या हमारे प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह कर रहे हैं? इन सवालों का जवाब ढूंढने के लिए हमें गहराई से विचार करना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे हादसे भविष्य में न हों।

