उत्तरी कोरिया ने नई नौसैनिक विनाशक कांग कोन को आधिकारिक तौर पर सेवा में उतारा, जिसका वजन पाँच हजार टन है और इसे परमाणु‑सक्षम बताया गया है। नेता किम जोंग‑उन ने इस जहाज़ को राष्ट्रीय परमाणु प्रतिकार प्रणाली के समर्थन हेतु एक आक्रामक साधन कहा, जिससे देश की रक्षा नीति में नई दिशा स्पष्ट हुई। इस प्रकार का समुद्री हथियार राष्ट्र की रणनीतिक क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
पिछले कुछ हफ्तों में किम जोंग‑उन ने कई बार कहा था कि उत्तर कोरिया को एक परमाणु राज्य के रूप में अपनी स्थिति को दृढ़ करना ही अनिश्चित अंतरराष्ट्रीय माहौल से निपटने का एकमात्र उपाय है। उन्होंने अपने देश के परमाणु शस्त्रागार को विश्व में अग्रणी बनाने की इच्छा भी व्यक्त की थी। कांग कोन का अनावरण इन बयानों के साथ सामंजस्य स्थापित करता है, जिससे समुद्री क्षेत्र में परमाणु‑सक्षम शक्ति का विस्तार स्पष्ट होता है।
इस विकास के कारण दक्षिण एशिया में सुरक्षा माहौल और जटिल हो गया है। भारत और मलेशिया ने हाल ही में नई दिल्ली में नौसैनिक स्टाफ वार्ता के दौरान भारतीय महासागर में समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने पर चर्चा की थी, जिससे क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता स्पष्ट हुई। उत्तर कोरिया की इस नई नौसैनिक शक्ति को देखते हुए पड़ोसी देशों को अपनी रक्षा रणनीति में पुनः विचार करना पड़ सकता है, ताकि समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे।

