सेबी ने शुक्रवार को क्लोज़िंग ऑक्शन सत्र (सीएएस) की मूल्य निर्धारण पद्धति को संशोधित करने के लिए एक परिपत्र जारी किया, जिससे पूँजी बाजार के प्रमुख शेयरों में उल्लेखनीय उछाल देखा गया। इस कदम के पीछे ट्रेडरों की सीएएस‑संबंधित मूल्य निर्धारण के प्रति असंतोष था, जो अगस्त ३ से अस्थिर प्रिंटों के कारण विकल्प प्रीमियम में बड़े उतार‑चढ़ाव का कारण बन रहा था। इस परिपत्र ने बाजार को आश्वस्त किया कि अब एकल सीएएस प्रिंट पर अत्यधिक निर्भरता नहीं रहेगी, जिससे ट्रेडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी।
पिछले हफ्तों में बीएसई द्वारा भारत का पहला आरईआईटी और वाणिज्यिक रियल एस्टेट सूचकांक लॉन्च करने से निवेशकों को नई पासिव निवेश विकल्प मिले, जबकि आईटी सेक्टर में इन्फोसिस, टीसीएस आदि के शेयरों ने ५ % तक की उछाल दर्ज की। इन सकारात्मक संकेतों ने बाजार में जोखिम लेने की इच्छा को पुनः जाग्रत किया, जिससे सीएएस सुधार की खबर पर शेयरों में तेज़ी आई। ट्रेडिंग सत्र में निफ्टी आईटी सूचकांक ने भी चार सत्र की गिरावट के बाद लगभग ४ % की उछाल दिखाई।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी की नई नीति से बाजार में विश्वास पुनः स्थापित होगा और ट्रेडिंग वॉल्यूम में मौजूद अटकलें समाप्त होंगी। यह कदम मौसमी मल्टीबैगर रुझानों को भी सुदृढ़ करेगा, क्योंकि जुलाई‑सितंबर तिमाही में कई स्टॉक्स ने लगातार २० % से अधिक की वृद्धि दर्ज की है। अंततः, निवेशकों को आशा है कि स्थिर और पारदर्शी मूल्य निर्धारण तंत्र के साथ भारतीय पूँजी बाजार की गति और मजबूती से आगे बढ़ेगी।
