भारतीय मुद्रा बाजार में इस सप्ताह दो दिन तक रुपया 95 के स्तर से ऊपर बना रहा, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत 94.97 पर स्थिर रही। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिरता का मुख्य कारण भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा डॉलर की बड़ी मात्रा में बिक्री है, जिससे बाजार में अतिरिक्त डॉलर की आपूर्ति हुई और रुपया को समर्थन मिला।
पिछले कुछ दिनों में रुपया लगातार गिरावट का सामना कर रहा था; 29 जून को 9 पैसे और 30 जून को 5 पैसे की गिरावट दर्ज हुई थी। इस गिरावट के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, तथा मजबूत डॉलर की प्रवृत्ति प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इन परिस्थितियों ने निवेशकों के जोखिम‑भरे मनोभाव को बढ़ा दिया, जिससे शेयर बाजार में भी तेज़ी से गिरावट आई।
आरबीआई की इस बार की हस्तक्षेपात्मक नीति ने मुद्रा को 95 के स्तर से नीचे गिरने से रोका। राज्य‑स्वामित्व वाले बैंकों ने संभावित अवमूल्यन को रोकने के लिए डॉलर बेचकर बाजार में संतुलन बनाए रखा। इस कदम को वित्तीय विशेषज्ञों ने सकारात्मक रूप से सराहा, क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनी रही और निवेशकों का भरोसा पुनः स्थापित हुआ। साथ ही, आर्थिक अस्थिरता के बीच सामाजिक क्षेत्रों, जैसे ओडिशा में अँगनवाड़ी केंद्रों में जातीय भेदभाव के मुद्दे, भी सरकार की सक्रिय भूमिका की आवश्यकता को उजागर करते हैं।
