स्टेटमेंट ऑफ़ अकाउंट (SoA) मोड में म्यूचुअल फंड यूनिट्स को सीधे फंड हाउस के खाते में रखा जाता है। इस विधि में निवेशक को कोई डिमैट शुल्क नहीं देना पड़ता और प्रक्रिया सरल रहती है, जिससे छोटे निवेशकों को आकर्षित किया जाता है। हालांकि, यदि निवेशक को फंड के अलावा अन्य प्रतिभूतियों का भी प्रबंधन करना है, तो SoA में अलग‑अलग खाते बनाना पड़ता है, जिससे पोर्टफोलियो का समग्र दृश्य सीमित रह जाता है।

डिमैट मोड में फंड यूनिट्स को इलेक्ट्रॉनिक रूप से डिमैट खाते में जमा किया जाता है, जहाँ शेयर, बॉन्ड और अन्य सिक्योरिटीज़ भी संग्रहीत होते हैं। यह एकीकृत प्रबंधन की सुविधा देता है, जिससे निवेशक को सभी संपत्तियों का एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर निरीक्षण और लेन‑देन करने में आसानी होती है। डिमैट खाते में रखरखाव शुल्क और ब्रोकरेज शुल्क लग सकते हैं, परन्तु कई ब्रोकरेज फर्म इन शुल्कों को कम या मुफ्त कर देती हैं, जिससे लागत अंतर घट जाता है।

दोनों मोड में स्वचालित निकासी (SWP) और स्वचालित पुनर्निवेश (STP) की सुविधा उपलब्ध है, जिससे निवेशक नियमित आय या पुनर्निवेश की योजना बना सकते हैं। बाजार में पासिव निवेश की तेज़ी से बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की लचीलापन और लागत को ध्यान में रखकर SoA या डिमैट में से उपयुक्त विकल्प चुनना चाहिए। भविष्य में यदि निवेशक कई प्रकार की प्रतिभूतियों में विविधीकरण करना चाहते हैं, तो डिमैट मोड अधिक लाभदायक सिद्ध हो सकता है।