काश्यप जावेरि ने कहा कि निफ्टी के २१ गुना पीई अनुपात को देखकर भारत के बाजार को ही कम आंकना उचित नहीं है, क्योंकि यह केवल कुछ बड़े कंपनियों के एकत्रीकरण को दर्शाता है। इस एकत्रीकरण के कारण संपूर्ण बाजार का औसत मूल्यांकन अधिक दिखता है, जबकि मध्य और छोटे पूँजीकरण वाले कंपनियों की आय वृद्धि तेज़ी से बढ़ रही है।
वर्तमान में सिस्टेमैटिक निवेश योजना के माध्यम से नियमित रूप से निवेशकों का प्रवाह बना हुआ है, जिससे बाजार में स्थिरता आती है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिक्री में धीरे-धीरे कमी आई है, जो पिछले महीनों में देखी गई तीव्र बिक्री के बाद एक सकारात्मक संकेत है। यह प्रवाह विविधता में वृद्धि की दिशा में पूँजी को आकर्षित कर सकता है, जैसा कि रितेश टाकसाली ने अपने पिछले विश्लेषण में बताया था।
हालाँकि, कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल और मुद्रा उतार-चढ़ाव जैसे बाहरी जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन जोखिमों के कारण बाजार में अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। समग्र रूप से, सूचकांक के एकत्रीकरण को समझते हुए व्यक्तिगत शेयरों के मूल्यमापन को देखना अधिक लाभदायक रहेगा।
