आईएफसीआई के शेयरों ने एक महीने में लगभग तीस प्रतिशत की चढ़ाई के बाद आज सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। यह गिरावट भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा एनएसई आईपीओ को मंजूरी मिलने के बाद बाजार में उत्पन्न उत्साह के बाद आई। आईएफसीआई का एनएसई में अप्रत्यक्ष निवेश स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया के शेयरों के माध्यम से है, जिससे इस गिरावट का असर व्यापक निवेशकों तक पहुँचा।

पिछले हफ्ते पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने जर्मनी की नागर्रो कंपनी को एक अरब यूरो में खरीदने का प्रस्ताव रखा, जिससे एशिया‑पैसिफिक आईटी क्षेत्र में निवेशकों का ध्यान आकर्षित हुआ। इसी समय अमेरिकी शेयर बाजार में तकनीकी और अर्धचालक कंपनियों के शेयरों में गिरावट ने वैश्विक जोखिम भावना को कमजोर किया, जिससे भारतीय बाजार में भी समान प्रवृत्ति देखी गई।

केरल में भारतीय मेडिकल एसोसिएशन ने जूनियर डॉक्टरों के न्यूनतम वेतन को बढ़ाने की मांग की, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी खर्च और नीतियों पर चर्चा तेज़ हुई। इस प्रकार, विभिन्न क्षेत्रों में चल रही आर्थिक और सामाजिक बहसें भारतीय शेयर बाजार की अस्थिरता को और बढ़ा रही हैं, और आईएफसीआई जैसे वित्तीय संस्थानों के शेयरों पर भी असर डाल रही हैं।