बेहरामपुर में एमवी कांस्टेबल अशुतोष मृदंगिया की हत्या के मामले में ओडिशा उच्च न्यायालय ने पुलिस की जाँच को अपर्याप्त मानते हुए इसे राज्य अपराध शाखा, सीबी‑सीआईडी को सौंपने का आदेश दिया। अदालत ने विशेष न्यायाधीश को यह निर्देश दिया कि सभी दस्तावेज़ और साक्ष्य तुरंत एसपी को सौंपे जाएँ, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि न्यायालय गंभीर अपराधों में पारदर्शी प्रक्रिया को प्राथमिकता देता है।

अशुतोष को ५ जून को बीजीपुर पुलिस कॉलोनी से गंभीर अवस्था में बचाया गया और एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान दो मृत्युदोषण दर्ज किए गए, जिनमें उन्होंने अपनी पत्नी संध्या और साले को जलाने में शामिल बतलाया। पुलिस ने आरोपियों पर बहु-प्रश्नावली (पॉलीग्राफ) परीक्षण किया, परन्तु परिणाम संतोषजनक नहीं निकला, और कई बार गिरफ्तारियों का वादा किया गया पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

यह मामला बेहरामपुर में हाल ही में घटी कई प्रमुख घटनाओं के साथ जुड़ा हुआ है। पिछले महीने रामायण यात्रा में आग की घटना ने सार्वजनिक सुरक्षा पर सवाल उठाए थे, जबकि पिताबास पांडा हत्या मामले में भी उच्च न्यायालय ने गहन जांच का आदेश दिया था। इसी प्रकार, ओडिशा हाई कोर्ट ने ३० वर्षों की सेवा के बाद दो सफाई कर्मचारियों को २० लाख रुपये की राशि देने का आदेश दिया, जिससे न्यायिक सक्रियता का संकेत मिलता है। इन सभी घटनाओं ने बेहरामपुर में न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता को उजागर किया है, और सीबी‑सीआईडी की जांच इस आशा को पूरा करेगी।