बालासोर जिले के बिचित्रापुर वन में मंगलवार को पाँच बड़े आकार के जीव देखे गये, जिनका स्वरूप ओरंगुटान जैसा था। स्थानीय निवासियों ने इनका फोटो‑वीडियो ले लिया और आसपास के लोगों को इकट्ठा कर दिया। वन विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुँचे, जीवों को सुरक्षित कर पशु चिकित्सालय ले गये जहाँ उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच की गई।
इन जीवों की सटीक प्रजाति अभी तक स्थापित नहीं हुई है, क्योंकि ओरंगुटान भारत के स्वदेशी जीव नहीं हैं। यह घटना पिछले कुछ हफ्तों में हुए अन्य वन संबंधी घटनाओं के साथ मिलकर विभाग के लिए चुनौती बन गई है, जैसे कि बालासोर में समुद्र‑मध्य में पक्षियों का अवैध शिकार और अंगुल के सतकोसिया अभयारण्य में हाथी के हमले में वन कर्मचारी की मृत्यु। इन सभी घटनाओं ने वन विभाग को वन्यजीव संरक्षण और अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने की आवश्यकता को उजागर किया है।
वर्तमान में वन विभाग इस बात की जाँच कर रहा है कि ये पाँच जीव कैसे बिचित्रापुर के वन में पहुँचे। क्या इन्हें पालतू रूप में रखा गया था, कहीं से लाया गया और फिर छोड़ दिया गया, या फिर कोई अन्य प्रजाति है जो ओरंगुटान से मिलती‑जुलती दिखती है। विभाग के अधिकारी इन जीवों की शारीरिक जांच के साथ‑साथ उनके मूल स्थान का पता लगाने के लिये विशेषज्ञों की मदद ले रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसे अनपेक्षित मामलों को रोका जा सके।

