दिल्ली के पुरानी राजिंदर नगर के आसपास स्थित कई छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों ने हाल ही में असुरक्षा और गंदगी के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया। 2024 की बरसात में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे तीन छात्रों की जलजला में मृत्यु ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया था, परन्तु आज भी कई आवासीय इकाइयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है। छात्र बताते हैं कि दरवाज़े टूटे‑फूटे, पानी की निकासी नहीं, और सुरक्षा व्यवस्था अनुपस्थित है, जिससे उन्हें जेल जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है।

यह समस्या केवल छात्रावासों तक सीमित नहीं है; राज्य के विभिन्न संस्थानों में भी सुरक्षा और प्रबंधन की लापरवाही के उदाहरण सामने आए हैं। ओडिशा के रेडहखोल उपजेल में प्रमुख वार्डर‑कैदी संबंध की जांच, तथा रायगड़ा में भीड़ द्वारा किए गए हमले को ‘रेड फ्लैग’ दर्जा मिलने से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक लापरवाही का दायरा व्यापक है। इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि संस्थागत ढांचे में सुधार की आवश्यकता अत्यावश्यक है।

विद्यार्थियों ने तत्काल सुधार की मांग की है: जल निकासी की व्यवस्था, दरवाज़ों की मरम्मत, नियमित सुरक्षा जांच और साफ-सफाई की जिम्मेदारी तय करना। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि वे इस मुद्दे को प्राथमिकता दें और छात्रावासों को रहने योग्य बनाएं। यदि यह समस्या अनदेखी रही तो भविष्य में और अधिक त्रासदी हो सकती है, जिससे न केवल छात्रों की सुरक्षा बल्कि शैक्षणिक माहौल भी प्रभावित होगा।