संयुक्त राष्ट्र ने १ जुलाई को एक नई मानचित्र जारी की, जिसमें अरुणाचल प्रदेश को स्वतंत्र राज्य के रूप में दिखाया गया और यह मानचित्र संयुक्त राष्ट्र महासभा के बहस में व्यापक रूप से उपयोग हुआ। भारत ने इस मानचित्र में मौजूद असंगतियों को उजागर करते हुए कहा कि यह मानचित्र भारत की संप्रभुता और सीमा रेखाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है। विशेष रूप से अक्साई चिन के चिन्हों को लेकर भारत ने स्पष्टता की मांग की, क्योंकि यह क्षेत्र चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद का हिस्सा है।
पिछले कुछ हफ्तों में अरुणाचल में चीन की उपस्थिति को लेकर कई रिपोर्टें सामने आईं, जैसे कि टाकसिंग क्षेत्र में चीन के सैनिकों की मौजूदगी पर भारत की सेना से स्पष्टीकरण की मांग। मानव अधिकार अरुणाचल जैसी नागरिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई और सीमा सुरक्षा के प्रति सतर्कता बढ़ाने की अपील की। इसी बीच, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पासीघाट शाखा ने पद्मश्री यानुंग जामोह की आयुर्वेदिक क्लिनिक को एयरपोर्ट की कुर्सियाँ दान की, जिससे क्षेत्र में सामाजिक विकास के प्रयास भी जारी हैं।
इन घटनाओं के प्रकाश में भारत ने संयुक्त राष्ट्र से इस मानचित्र की शुद्धता पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाने की तैयारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मानचित्र में सुधार नहीं किया गया तो यह भारत-चीन संबंधों में नई तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर सकता है। इसलिए, सरकार ने सभी संबंधित पक्षों से मिलकर इस मानचित्र की त्रुटियों को दूर करने और शांति एवं स्थिरता को बनाए रखने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया है।

