विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने कहा कि भारत के संप्रभु क्षेत्र को दर्शाते हुए किसी भी विश्व मानचित्र में जम्मू‑कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दिखाना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि भारत ने अपने मानचित्र में इन क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से सीमांकित किया है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसको मान्यता दिलाना आवश्यक है। इस संदर्भ में, संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित नए विश्व मानचित्र के मसौदे में यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए।
पिछले कुछ हफ्तों में लद्दाख में विभिन्न सामाजिक और पर्यावरणीय पहलें देखी गईं, जैसे कि एक व्यापक बंदी और पर्यावरण संरक्षण के कदम। इन घटनाओं ने भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में राष्ट्रीय एकता और विकास के महत्व को दोहराया है। लद्दाख के लोगों ने योग के माध्यम से शांति और सहयोग का संदेश दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय जनसंख्या राष्ट्रीय नीतियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है। इस प्रकार, मानचित्र में सही चित्रण न केवल भू‑राजनीतिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में भी महत्वपूर्ण है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि किसी भी गलत या भ्रामक चित्रण को भारत की संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में देखा जाएगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उचित कदम उठाए जाएंगे। इस दिशा में, भारत ने कई देशों के साथ संवाद स्थापित किया है और अपने मानचित्र की सटीकता को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सहायता भी प्रदान की है। अंततः, यह स्पष्ट है कि विश्व मानचित्र में भारत के सीमाओं का सही प्रतिबिंब राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के लिए अत्यावश्यक है।

