इस सप्ताह पच्चीस वर्ष बीत चुके हैं जब 9/11 के भयावह हमले न्यूयॉर्क और वाशिंगटन को ध्वस्त कर चुके थे, जिससे लगभग तीन हजार लोगों की जान गई और मध्य पूर्व में दशकों की अस्थिरता उत्पन्न हुई। अब विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी सरकार ने आतंकविरोधी प्रयासों में बजट में कटौती की है, अनुभवी अधिकारियों को सेवा से बाहर कर दिया है और नई खतरों की ओर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे लापरवाही का माहौल बन रहा है। यह स्थिति नई हमले की संभावना को फिर से बढ़ा रही है।

वित्तीय बाजारों में भी इस बदलाव की झलक मिलती है; विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस सप्ताह लगभग दो हजार आठ सौ करोड़ रुपये की बिक्री की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी। यह संकेत देता है कि आर्थिक संसाधन भी सुरक्षा क्षेत्र से हट रहे हैं। इसी बीच, उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने तवी आरती और प्रकाश एवं ध्वनि प्रदर्शन का उद्घाटन किया, जिससे स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली।

स्थानीय स्तर पर बुखारी ने पुरानी शहर के लिए विशेष पैकेज की मांग की, यह दर्शाता है कि विभिन्न क्षेत्रों में उपेक्षा का असर व्यापक है। विशेषज्ञ इस बात पर बल देते हैं कि यदि आतंकविरोधी संस्थाओं को आवश्यक संसाधन नहीं मिलेंगे तो भविष्य में फिर से बड़े पैमाने पर हमले हो सकते हैं। इसलिए, नीति निर्माताओं को बजट पुनः आवंटन, अनुभवी कर्मियों की पुनः भर्ती और सतर्कता को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।