चेन्नई में पेरो की गृह सजावट प्रदर्शनी से पहले संस्थापक अनित अरोरा ने कहा कि उन्होंने बीस वर्षों से भारतीय वस्त्रों के अभिलेखों को संजोया है। चंदेरी की नाज़ुक बुनाई, महेश्वरी की चमकदार सूती, लिनेन की ठंडक, मशरु की धारीदार पैटर्न, जामदानी ब्रोकेड की जटिलता और गमचा की जाँच जैसी विविध शैलियों को उन्होंने आधुनिक फर्नीचर और सजावटी वस्तुओं में रूपांतरित किया है। यह प्रयास भारतीय शिल्प को वैश्विक मंच पर लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पिछली कुछ महीनों में भारतीय हस्तशिल्प को नई पहचान मिली है। येट्टु नामक इंस्टेंट कॉफ़ी ने पारम्परिक काफ़ी के स्वाद को सेकंड में उपलब्ध कराकर बाजार में धूम मचा दी, जबकि भवानी में जामक्कलम की पुनरुद्धार ने जीआई‑टैग वाले वस्त्रों को बैग, शर्ट और दीवार कला में बदल दिया। कश्मीर के फर‑लेदर कलाकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने अनोखे उत्पादों से पहचान बनाई। इन सफलताओं ने पेरो को प्रेरित किया कि वह भी शिल्प को आधुनिक जीवनशैली के साथ जोड़ सके।
पेरो की इस नई पहल से भारतीय उपभोक्ताओं को पारम्परिक कला की सुंदरता को अपने घरों में लाने का अवसर मिलेगा। अनित अरोरा ने कहा कि यह प्रदर्शनी न केवल सजावट का नया विकल्प प्रस्तुत करेगी, बल्कि शिल्पकारों को आर्थिक सशक्तिकरण भी देगी। चेन्नई के दर्शक इस अनूठे मिश्रण को देख कर अपने घरों को नई रचनात्मकता से सजा सकते हैं, जिससे भारतीय शिल्प की निरंतरता और विकास सुनिश्चित होगा।

