न्यूयॉर्क शहर के मेयर ज़ोहरान मद्दानी और शिक्षा सचिव कामर एच. सैम्युएल्स ने दो सितंबर को एक संयुक्त घोषणा में कहा कि वे आठवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर एक वर्ष की मोराटोरियम लागू करेंगे। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य, डेटा सुरक्षा और शैक्षणिक निष्पक्षता को सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उपलब्ध एआई उपकरणों में गलत जानकारी फैलाने और व्यक्तिगत डेटा का दुरुपयोग करने की संभावना अधिक है, इसलिए एक परीक्षण अवधि के दौरान इन जोखिमों को समझना आवश्यक है।

यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी निगरानी के बढ़ते प्रवृत्ति के साथ मेल खाता है। पिछले महीने कश्मीर के केंद्रीय विश्वविद्यालय ने राजभाषा हिंदी के विकास में आईटी उपकरणों की भूमिका पर एक कार्यशाला आयोजित की, जिसमें भाषा संरक्षण और डिजिटल शिक्षा के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। इसी प्रकार, संयुक्त राज्य में प्रवासी निगरानी के लिए एआई‑आधारित उपकरणों के उपयोग पर भी आलोचनात्मक रिपोर्टें सामने आई हैं, जो डेटा गोपनीयता और मानवाधिकारों के उल्लंघन की चेतावनी देती हैं। इन पृष्ठभूमियों को देखते हुए, न्यूयॉर्क की यह रोक तकनीकी प्रगति और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है।

भविष्य में इस मोराटोरियम के समाप्त होने पर शिक्षा विभाग ने कहा है कि वे एआई उपकरणों के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और निगरानी तंत्र विकसित करेंगे। इसमें शिक्षक प्रशिक्षण, छात्र अभिप्राय और तकनीकी कंपनियों के साथ पारदर्शी समझौते शामिल होंगे। यदि यह नीति सफल रहती है, तो अन्य अमेरिकी शहरों और विश्व के शैक्षणिक संस्थानों में भी समान प्रतिबंध या नियमन लागू हो सकते हैं, जिससे शैक्षिक तकनीक के उपयोग में एक नया मानक स्थापित हो सकता है।