लेपज़िग में पिछले महीने हुए ड्रोन हमले ने यूरोपीय संघ को गहरी चिंता में डाल दिया। जर्मनी ने इस हमले की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से रूस पर थोपते हुए, इसे राज्य‑प्रायोजित आतंकवाद का एक उदाहरण कहा। इस पर यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख ने कहा कि यह हमला यूरोप को विभाजित करने और यूक्रेन के समर्थन को कमजोर करने की रूसी रणनीति का हिस्सा है। इस प्रकार की घटनाएँ यूरोपीय सुरक्षा संरचना को नई चुनौतियों का सामना करवा रही हैं।
इस हमले को समझने के लिए हमें पिछले कुछ हफ्तों की घटनाओं को देखना आवश्यक है। ईरान ने हाल ही में संयुक्त राज्य को ‘भारी प्रतिक्रिया’ की चेतावनी दी थी और कहा था कि उसकी सीमाओं का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उसी समय ईरान ने बहरीन पर ड्रोन हमला किया और खाड़ी में जहाज़ को निशाना बनाया, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया। साथ ही यूक्रेन द्वारा रूस के तेल संयंत्रों पर किए गए ड्रोन हमलों ने रूस में ईंधन की कमी और लंबी कतारें उत्पन्न कर दी हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इन सभी घटनाओं ने दिखाया है कि राज्य‑प्रायोजित या समर्थित ड्रोन हमले अब एक सामान्य रणनीति बनते जा रहे हैं।
यूरोपीय संघ अब इस परिदृश्य में एकजुट प्रतिक्रिया देने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। सदस्य देशों ने कहा है कि किसी भी प्रकार के आतंकवादी हमले को सहन नहीं किया जाएगा और इसके लिए कूटनीतिक तथा सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ किया जाएगा। इस बीच, यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री ने कहा कि रूस को यूरोप के भीतर विभाजन की कोशिशों से रोकना आवश्यक है और इस प्रकार के हमलों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना होगा। इन सभी कदमों से यूरोप की सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने में मदद मिलेगी।

