ओपनएआई ने हाल ही में जीपीटी‑5.6 मॉडल का सीमित प्रीव्यू जारी किया, जिसमें विश्वसनीय साझेदारों को नई क्षमताओं का परीक्षण करने का अवसर मिला। उसी समय, कंपनी ने भारत में प्रभजीत सिंह को प्रबंध निदेशक नियुक्त किया, जिससे भारतीय बाजार में उसकी उपस्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। इन घटनाओं के बीच, गणितीय समुदाय में यह दावा उभरा कि ओपनएआई ने अपने विशाल कंप्यूटिंग संसाधनों और संभवतः शैक्षणिक शोधकर्ताओं के निजी डेटा का उपयोग करके एक मिलियन‑डॉलर मूल्य की खुली समस्या का समाधान पाया है।

यदि यह दावा सत्य हो, तो यह न केवल गणित के इतिहास में एक मील का पत्थर होगा, बल्कि डेटा गोपनीयता और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में गंभीर प्रश्न भी उठाएगा। पिछले महीने ऑक्समिक लैब्स ने ३५ मिलियन डॉलर की सीरीज़‑ए फंडिंग प्राप्त की, जिससे उसकी कुल पूँजी ६० मिलियन डॉलर तक पहुंच गई। इस फंडिंग ने एआई अनुसंधान में नई संभावनाओं को उजागर किया, परन्तु साथ ही डेटा सुरक्षा के मुद्दे भी सामने आए।

विशेषज्ञों का मानना है कि ओपनएआई को इस प्रकार के डेटा उपयोग के लिए स्पष्ट अनुमति और पारदर्शी नीतियों की आवश्यकता है। यदि कंपनी ने बिना अनुमति के शोधकर्ताओं के डेटा का उपयोग किया है, तो यह कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस स्थिति में नियामक संस्थाओं को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है, और एआई कंपनियों को डेटा संग्रह और उपयोग के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।