कोट्टारकारा तालुका अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में रोगी द्वारा दर्ज किए गए वीडियो में दिखा कि ड्यूटी डॉक्टर ने बुखार और तीव्र शरीर दर्द की शिकायत करने वाले मरीज से तीव्र स्वर में बहस की, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। मरीज ने बताया कि डॉक्टर ने उसकी स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया और अनावश्यक रूप से उसे चिल्लाया। इस दृश्य को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया, जिससे अस्पताल की प्रतिष्ठा पर प्रश्न उठे।

यह घटना ओडिशा में दयाल गंगवार के खिलाफ विभागीय जांच, भद्राद्री कोठागुडेम में डॉक्टर निलंबन और मणिपुर में पुलिस अधिकारी के स्थानांतरण की मांग जैसी पिछली घटनाओं की श्रृंखला में आती है। इन सभी मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों ने अनुशासनात्मक कदम उठाने का संकल्प दिखाया है, जिससे स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के मानकों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता स्पष्ट हुई है। इस संदर्भ में, कोट्टारकारा में भी समान कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

हेल्थ विभाग ने तुरंत एक विशेष जांच टीम गठित की और विभागीय चिकित्सा अधिकारी ने डॉक्टर के खिलाफ स्थानांतरण व विभागीय कार्रवाई की सिफ़ारिश की। यदि जांच में अनुचित व्यवहार सिद्ध होता है, तो डॉक्टर को निलंबित या हटाया जा सकता है। इस कदम से जनता को आश्वासन मिला है कि स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन और रोगी के अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अस्पताल में कर्मचारियों के प्रशिक्षण एवं निगरानी को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।