विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में बिहार के जनतादल (यु) सांसद संजय झा को लिखित उत्तर दिया, जिसमें उन्होंने 1996 में भारत‑बांग्लादेश के बीच हस्ताक्षरित गंगा जल उपयोग संधि के नवीनीकरण पर चर्चा की। यह संधि 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली है और बिहार ने कहा है कि इस संधि के कारण राज्य के जल संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे कृषि उत्पादन और दैनिक जल आपूर्ति दोनों पर दबाव बढ़ा है। जयशंकर ने कहा कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी और संधि के पुनरावलोकन में बिहार की चिंताओं को प्राथमिकता देगी।
पिछले कुछ हफ्तों में देश में विभिन्न क्षेत्रों से जल सुरक्षा संबंधी बहसें तेज़ हुई हैं। उदाहरण के तौर पर, पिछले महीने जनरलिया डी‑सौजा ने वाट पुर्निमा के अवसर पर गंगा में स्नान करके अपने पति रितेश देशमुख को याद किया, जिससे गंगा के धार्मिक और सामाजिक महत्व पर फिर से चर्चा हुई। इसी प्रकार, रक्षा पैनल ने बड़े मूल्य के अधिग्रहण प्रस्तावों पर विचार करने की घोषणा की, जिससे राष्ट्रीय संसाधनों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर प्रकाश पड़ा। इन घटनाओं ने जल संसाधनों के प्रबंधन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की आवश्यकता को और स्पष्ट किया।
वर्तमान में, विदेश मंत्रालय गंगा जल के दोबारा उपयोग के लिए भारत‑बांग्लादेश के बीच संवाद को सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहा है। यह प्रयास न केवल बिहार की जल समस्याओं को हल करने में मदद करेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच पारस्परिक सहयोग को भी बढ़ाएगा। साथ ही, वैष्णव हिन्दू परिषद (वी.एच.पी.) ने राम मंदिर में हुए दान चोरी के मामले में उचित कार्रवाई की प्रतीक्षा करने का बयान दिया, जिससे राष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता स्पष्ट हुई। इन सभी पृष्ठभूमियों को देखते हुए, जयशंकर का यह आश्वासन कि बिहार की चिंताओं को संधि नवीनीकरण में शामिल किया जाएगा, एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

