जॉन स्विननी ने मंगलवार को स्कॉटलैंड के राष्ट्रीय कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में कहा कि वह रोटी, दूध और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी मूल्य सीमा लागू करने के अपने प्रस्ताव को नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने बताया कि महंगाई के बढ़ते दबाव में परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है, और यह कदम उपभोक्ताओं को स्थिर कीमतों का आश्वासन देगा।

यह प्रस्ताव कृषि और व्यापार संघों की कड़ी आलोचना का सामना कर रहा है, जिन्होंने इसे “अव्यवहारिक” और “बाजार में हस्तक्षेप” कहा है। फिर भी स्विननी ने कहा कि यह नीति सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक है, क्योंकि कई परिवारों को मूलभूत खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पिछले हफ्ते एडिनबर्ग में हुए हिंसक हमलों और ईंधन कीमतों में गिरावट के बाद सार्वजनिक भावना में बदलाव को भी उल्लेख किया, जिससे सरकार को सामाजिक स्थिरता पर अधिक ध्यान देना पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मूल्य सीमा को प्रभावी रूप से लागू किया गया तो यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को स्थिर करने में मदद कर सकता है और आर्थिक असमानता को घटा सकता है। हालांकि, इस नीति के कार्यान्वयन में सरकारी निगरानी, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और किसानों के साथ संवाद की आवश्यकता होगी। स्विननी ने कहा कि सरकार इस दिशा में सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम करेगी, ताकि स्कॉटलैंड के परिवारों को आवश्यक खाद्य वस्तुओं की सस्ती और निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।