तरानेह और रोमिना रहिमी, दो जुड़वां बहनें, जो हाई स्कूल में पढ़ रही थीं, को जनवरी के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के बाद इस्लामी क्रांतिकारी गार्डों ने रात के अंधेरे में अपहरण कर लिया। उन्हें बंधक बनाकर, उनके पैर तोड़ दिए और बाल खींचे, जिससे वे शारीरिक रूप से बिखर गईं। इस दौरान जेल के पहरेदारों ने धमकी दी कि यदि वह स्वीकार नहीं करतीं तो उन्हें बलात्कार का सामना करना पड़ेगा।
चार महीने तक माँ मरज़िएह नूरमोहमदी को कोई सूचना नहीं मिली, जब वह अंततः जेल में गईं तो उन्होंने देखा कि उनकी बेटियों की हालत अभूतपूर्व थी। इस दर्दनाक दृश्य ने अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को गहरी चिंता में डाल दिया और इरान की न्यायिक प्रणाली पर सवाल उठाए। इसी प्रकार, अन्नत अंबानी की तिरुमाला मंदिर यात्रा और फुलबानी में दहेज हत्या के मामले में न्याय की प्रक्रिया ने भी सार्वजनिक चर्चा को तीव्र किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि न्याय प्रणाली में पारदर्शिता की कमी है।
अब जुड़वां बहनों को मौत की सजा सुनाई गई है, जबकि मद्रास हाई कोर्ट ने भी बाल यौन शोषण के मामलों में कठोर दंड को लागू किया है। यह सजा न केवल इरान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का संकेत देती है, बल्कि विश्व भर में न्याय के प्रति विश्वास को भी क्षीण करती है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इस निर्णय की निंदा की है और इरान सरकार से तुरंत रिहाई तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है।

