सिडनी विश्वविद्यालय के कई विभागों में कर्मचारियों ने आज सुबह पिकट लाइन स्थापित कर हड़ताल का प्रदर्शन किया, जिसमें वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग पर स्पष्ट सुरक्षा उपायों की मांग कर रहे हैं। वे यह भी चाहते हैं कि विश्वविद्यालय के निर्णय‑प्रक्रिया में कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके। इस हड़ताल में कला‑समाज विज्ञान संकाय के कई प्रोफेसर और प्रशासनिक कर्मचारी शामिल हैं, जिन्होंने विश्वविद्यालय के प्रति भरोसा खो दिया है।
पिछले हफ्ते, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने २४‑घंटे की हड़ताल के बाद एक आंतरिक सर्वेक्षण के परिणाम प्राप्त किए, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि कोई भी कर्मचारी विश्वविद्यालय को अपने हितों के प्रति उत्तरदायी नहीं मानता। यह सर्वेक्षण उसी समय आया, जब न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय ने विश्व स्तर पर अपनी रैंकिंग में सुधार किया, जिससे सिडनी विश्वविद्यालय के भीतर प्रतिस्पर्धा और तनाव बढ़ गया। इस संदर्भ में, कर्मचारियों ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ कर्मचारियों के अधिकारों की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।
हड़ताल के दौरान, कई कर्मचारी अपने-अपने विभागों में कार्यस्थल छोड़कर सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा हुए, जहाँ उन्होंने न्यायसंगत वेतन, स्थायी रोजगार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर पारदर्शी नीतियों की मांग की। इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिला, क्योंकि हाल ही में हैदराबाद विश्वविद्यालय के अनुबंध कर्मचारियों ने समान अधिकारों के लिए अनिश्चितकालीन विरोध किया था। इस प्रकार, शिक्षा संस्थानों में श्रमिक अधिकारों की लड़ाई अब एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुकी है, और सिडनी विश्वविद्यालय की इस हड़ताल ने इस संघर्ष को नई ऊर्जा प्रदान की है।

