संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में भारत ने नई विश्व मानचित्र को मान्य करने वाले प्रस्ताव पर सकारात्मक मतदान किया। इस प्रस्ताव ने कहा कि मानचित्र में विकृति से अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के वास्तविक आकार को कम करके दिखाया जाता है, जिससे विश्व का असंतुलित चित्रण बनता है। भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी देशों को समान सम्मान मिलना चाहिए और मानचित्र में किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण प्रस्तुति स्वीकार्य नहीं है।
यह कदम भारत के पिछले बयानों के साथ संगत है, जहाँ उसने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के दो मानकों के खिलाफ अपनी अडिग स्थिति दोहराई थी। भारत ने कहा था कि “आतंकवादी वही है, चाहे वह कहीं से भी आए” और सभी राष्ट्रों से सामूहिक कार्रवाई की मांग की थी। इसी प्रकार, नई मानचित्र प्रस्ताव में भी वह समान सिद्धांत लागू करना चाहता है, अर्थात् सभी क्षेत्रों को समान रूप से दर्शाना।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में इस प्रस्ताव को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ देखी गईं। कुछ देशों ने मानचित्र में सुधार की आवश्यकता को स्वीकार किया, जबकि अन्य ने इस मुद्दे को भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा। संयुक्त राज्य के कुछ विधायकों ने भी हाल ही में मध्य पूर्व में युद्ध रोकने के लिए प्रस्ताव पारित किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक मंच पर संतुलित दृष्टिकोण की मांग बढ़ रही है। भारत का यह समर्थन विश्व मानचित्र को अधिक न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

