जून के अंत में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति ट्रम्प के जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के आदेश को निरस्त किया। न्यायालय ने कहा कि संविधान के चौदहवें संशोधन के तहत जन्म के समय नागरिकता स्वाभाविक रूप से मिलती है और इसे हटाने के लिए संसद की स्पष्ट विधायी प्रक्रिया आवश्यक है। इस निर्णय से उन सभी बच्चों को सुरक्षा मिली जो अमेरिकी नागरिक नहीं रहने वाले माता‑पिता के गर्भ में जन्मे थे।

यह फैसला ट्रम्प के कई समान प्रयासों के बाद आया है। पिछले महीने एक संघीय न्यायालय ने भी ट्रम्प की मतदाता पहचान प्रमाण की मांग को रोक दिया था, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा का संदेश मिला। इसी प्रकार, जुलाई में भी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रम्प के जन्मसिद्ध नागरिकता प्रतिबंध को खारिज कर दिया था, जिससे इस मुद्दे पर न्यायिक निरंतरता स्पष्ट हुई। इन सभी घटनाओं ने यह सिद्ध किया कि एकतरफा कार्यकारी आदेशों को न्यायिक समीक्षा से नहीं बचा जा सकता।

न्यायिक निर्णय के बाद राजनीतिक दलों और नागरिक समाज ने इसे लोकतंत्र की जीत के रूप में सराहा। कई विशेषज्ञों ने कहा कि यह निर्णय न केवल अमेरिकी नागरिकता के मौलिक सिद्धांत को सुरक्षित रखेगा, बल्कि भविष्य में समान प्रकार के अधिकार‑संबंधी विवादों में भी मार्गदर्शक रहेगा। अब सरकार को यदि कोई बदलाव करना हो तो उसे संसद के माध्यम से विधायी प्रक्रिया का पालन करना पड़ेगा, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन बना रहेगा।