कलेक्टर जी राजाकुमारी ने नंदियाल जिले में आयोजित वीडियो सम्मेलन में शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा विभाग और अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख अधिकारियों को बताया कि ‘मना बाड़ी‑मना भविष्यथु’ योजना के तहत स्कूलों की बुनियादी ढाँचा जानकारी को समय पर पोर्टल पर दर्ज न करना प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस लापरवाही के कारण राज्य की शैक्षिक रैंकिंग में गिरावट आ सकती है और इससे छात्रों के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
सम्पूर्ण भारत में पिछले वर्षों में शहरी क्षेत्रों में लापरवाही के कारण हुई कई दुखद घटनाओं को देखते हुए, कलेक्टर ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। बेंगलुरु में नागरिक लापरवाही से हुई मौतों की लगातार बढ़ती संख्या ने प्रशासनिक जवाबदेही की कमी को उजागर किया है, और अब शिक्षा क्षेत्र में भी इसी तरह की लापरवाही को रोकना अनिवार्य हो गया है।
कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों से अनुरोध किया कि वे अगले दो हफ्तों में सभी स्कूलों के बुनियादी ढाँचा डेटा को पूर्णता से पोर्टल पर अपलोड कर दें और नियमित रूप से अपडेट करते रहें। यदि समय सीमा के भीतर सुधार नहीं हुआ तो कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें पदस्थापना से हटाना या वित्तीय दंड शामिल हो सकता है। इस कदम से नंदियाल की राज्य रैंकिंग में सुधार होगा और भविष्य में शैक्षिक बुनियादी ढाँचा की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।

