मुंबई। वैश्विक बाजारों में गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। इसकी प्रमुख वजह इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम समझौते को लागू करने पर सहमति रही, जिससे निवेशकों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में नरमी दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तथा क्षेत्रीय तनाव कम होता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं घट सकती हैं, जिससे तेल कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

तेल कीमतों में गिरावट का असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है। कम कच्चे तेल की कीमतें भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इससे महंगाई और आयात बिल पर दबाव कम होता है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बनी हुई है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि क्षेत्र में शांति प्रयास सफल रहते हैं और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होती है, तो वैश्विक बाजारों में निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। हालांकि, मध्य पूर्व की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी नए घटनाक्रम का असर तेल एवं शेयर बाजारों पर तुरंत देखने को मिल सकता है।