पावर फाइनेंस कॉर्प ने अंतरराष्ट्रीय बांड के माध्यम से 300 मिलियन डॉलर की धन जुटाने में सफलता हासिल की है। यह भारत का दूसरा ऐसा निर्गम है, जो आरबीआई के विशेष स्वैप समझौते के बाद हुआ है। पांच साल के बांड की कीमत अमेरिकी सरकार के बांडों की तुलना में 105 बेसिस पॉइंट अधिक थी, जिससे एक बड़ा ऑर्डर बुक बना। यह कदम आरबीआई के 1.5% की निश्चित दर वाले स्वैप का फायदा उठाता है, जो बाहरी उधार लेने के लिए है। अन्य प्रमुख भारतीय बैंक भी इसी तरह के निर्गम की योजना बना रहे हैं।

पावर फाइनेंस कॉर्प के इस निर्गम से भारतीय बाजार में एक सकारात्मक संदेश गया है। यह दिखाता है कि भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने बांडों को सफलतापूर्वक बेच सकती हैं। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बाहरी उधार लेने के लिए एक सुरक्षित और किफायती विकल्प प्रदान करता है।

पावर फाइनेंस कॉर्प के अलावा, अन्य भारतीय बैंक भी इसी तरह के निर्गम की योजना बना रहे हैं। यह दिखाता है कि भारतीय बैंक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने बांडों को सफलतापूर्वक बेच सकते हैं। यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बाहरी उधार लेने के लिए एक सुरक्षित और किफायती विकल्प प्रदान करता है।