विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से 60 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है, जिससे चिंता उत्पन्न हुई है कि खुदरा निवेशक उनके निकास को वित्तपोषित कर रहे हैं। हालांकि, एएमएफआई सीईओ वेंकट एन चालासानी का तर्क है कि यह बाजार की परिपक्वता को दर्शाता है, जो भविष्य में विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि घरेलू म्यूचुअल फंड, विशेष रूप से एसआईपी, अस्थिरता को अवशोषित कर रहे हैं, जो महत्वपूर्ण तरलता और लचीलापन प्रदान कर रहे हैं, जो बाजार विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि भारतीय बाजार अब परिपक्व हो गया है और विदेशी निवेशकों के लिए एक आकर्षक स्थान बन गया है।
एसआईपी के माध्यम से निवेश करने वाले खुदरा निवेशकों ने बाजार की अस्थिरता को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके निवेश से बाजार में तरलता बनी रहती है, जो विदेशी निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि भारतीय बाजार में गहराई और विविधता है, जो इसे एक आकर्षक निवेश स्थान बनाती है।
एएमएफआई सीईओ के अनुसार, म्यूचुअल फंड ने विदेशी निवेशकों की निकासी के बावजूद बाजार में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह दिखाता है कि घरेलू म्यूचुअल फंड बाजार की अस्थिरता को प्रबंधित करने में सक्षम हैं और विदेशी निवेशकों को वापस लाने में मदद कर सकते हैं।
इस प्रकार, यह कहा जा सकता है कि एसआईपी और म्यूचुअल फंड विदेशी निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प हो सकते हैं। वे बाजार में तरलता और स्थिरता प्रदान करते हैं, जो विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में मदद कर सकते हैं। एएमएफआई सीईओ के अनुसार, म्यूचुअल फंड विदेशी निवेशकों को वापस लाने में मदद कर सकते हैं और भारतीय बाजार को एक आकर्षक निवेश स्थान बना सकते हैं।