विदेशी निवेशक भारत के सरकारी बांड बाजार में रिकॉर्ड गति से पैसा डाल रहे हैं, जो ब्याज और पूंजीगत लाभ पर कर छूट, व्यापक निवेश क्षेत्र और आरामदायक सीमाओं के कारण है। इन उपायों के साथ-साथ एक स्थिर रुपया और शांत राजनीतिक स्थितियों ने महत्वपूर्ण प्रवाह को बढ़ावा दिया है, जो वैश्विक कारकों और प्रमुख बांड सूचकांकों में शामिल होने पर जारी गति पर निर्भर करता है।
इस महीने के दौरान, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) ने भारत के सरकारी बांड बाजार में रिकॉर्ड राशि में पैसा डाला है। यह ब्याज और पूंजीगत लाभ पर कर छूट, व्यापक निवेश क्षेत्र और आरामदायक सीमाओं के कारण है।
इन उपायों के साथ-साथ एक स्थिर रुपया और शांत राजनीतिक स्थितियों ने महत्वपूर्ण प्रवाह को बढ़ावा दिया है।
इस महीने के दौरान, FPIs ने भारत के सरकारी बांड बाजार में 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। यह रिकॉर्ड है और इससे भारत के सरकारी बांड बाजार को एक बड़ा बढ़ावा मिला है।
विश्लेषकों का मानना है कि FPIs के इस निवेश के कारण भारत के सरकारी बांड बाजार में आगे भी महत्वपूर्ण प्रवाह होगा।