नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतें लगभग दो महीने के निचले स्तर तक पहुंच गईं, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों ने निवेशकों को राहत दी है।

रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के अधिकारी मध्य-पूर्व में जारी तनाव को कम करने के लिए एक समझौते के करीब पहुंच चुके हैं। बताया जा रहा है कि एक प्रारंभिक समझौता ज्ञापन (MoU) जल्द ही हस्ताक्षरित किया जा सकता है, जिससे क्षेत्रीय तनाव कम होने और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।

तेल बाजार को क्यों मिली राहत?

पिछले कई महीनों से अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण वैश्विक तेल बाजार दबाव में था। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

बाजार को उम्मीद है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता होता है और समुद्री व्यापार सामान्य होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में सुधार होगा और आपूर्ति संबंधी जोखिम कम होंगे।

दो महीने के निचले स्तर पर तेल

समझौते की उम्मीदों के बीच ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों प्रमुख कच्चे तेल बेंचमार्क में तेज गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने युद्ध और आपूर्ति बाधित होने के जोखिम को कम आंकना शुरू कर दिया है, जिसके चलते तेल बाजार में बिकवाली बढ़ गई।

विश्लेषकों का कहना है कि हाल के महीनों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतों में जो प्रीमियम जुड़ गया था, वह अब धीरे-धीरे कम हो रहा है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। तेल कीमतों में गिरावट भारत के लिए सकारात्मक मानी जाती है क्योंकि इससे आयात बिल कम हो सकता है और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव घट सकता है।

इसके अलावा, कच्चे तेल के सस्ते होने से महंगाई नियंत्रण में रखने में भी मदद मिल सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की संभावना है।

अभी भी बना हुआ है जोखिम

हालांकि बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।

यदि वार्ता में कोई बाधा आती है या क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है। इसलिए निवेशकों की नजर आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली आधिकारिक घोषणाओं पर बनी रहेगी।

ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि समझौता सफल रहता है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य गतिविधियां बहाल होती हैं, तो वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है और कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।