पटना: बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग इस बार चुनाव प्रक्रिया में बड़ा तकनीकी बदलाव करने जा रहा है। इस बार मतपत्रों (बैलेट पेपर) की जगह पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, चुनाव सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के पहले सप्ताह के बीच शुरू हो सकते हैं। सूबे की 4,000 से अधिक पंचायतों और 55 हजार से ज्यादा वार्डों में इस बार वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर नया आरक्षण रोस्टर प्रभावी होगा, जिससे कई मौजूदा दिग्गजों के समीकरण बिगड़ सकते हैं।

बिहार पंचायत चुनाव में इस बार कुल 6 पदों पर चुनाव होने हैं, जिनमें मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, ग्राम कचहरी सरपंच और पंचायत समिति अध्यक्ष शामिल हैं। इन सभी पदों पर EVM के माध्यम से मतदान होगा, जो कि एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे न केवल चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि मतगणना की प्रक्रिया भी तेज होगी।

वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर नया आरक्षण रोस्टर लागू होने से कई मौजूदा दिग्गजों के समीकरण बिगड़ सकते हैं। इससे नए चेहरों को आगे आने का मौका मिल सकता है और राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आ सकता है। साथ ही, यह बदलाव पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।

बिहार पंचायत चुनाव 2026 के लिए राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है। सभी दल अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने और चुनाव प्रचार शुरू करने की तैयारी में हैं। इस बार के चुनाव में कई नए मुद्दे और चुनौतियां होंगी, जिन पर सभी दलों को ध्यान देना होगा।

इस बार के चुनाव में EVM का इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण मुद्दा होगा। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा। साथ ही, यह बदलाव पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। बिहार पंचायत चुनाव 2026 के लिए सभी तैयारियां जोरों-शोरों से चल रही हैं और जल्द ही चुनाव की तारीखों की घोषणा की जाएगी।