नई दिल्ली: दिल्ली का वार्षिक बजट पेश होने के बाद विपक्ष और आम जनता ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष ने बजट को 'जनविरोधी' करार देते हुए कहा कि सरकार केवल वित्तीय आंकड़ों की बाजीगरी कर रही है, जबकि जमीन पर कोई काम नहीं दिख रहा। यमुना की सफाई, कूड़े के पहाड़ों का प्रबंधन और शुद्ध पेयजल आपूर्ति जैसे गंभीर संकटों के समाधान के लिए बजट में कोई स्पष्ट रोडमैप या समय सीमा तय नहीं की गई है।
नेताओं का कहना है कि सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता देने जैसी लोकलुभावन घोषणाएं तो कर देती है, लेकिन पिछले वादों का फंड आज तक वितरित नहीं हो पाया। इसके अलावा, पिछले वित्तीय वर्ष का एक बड़ा हिस्सा बिना खर्च किए ही रह गया, जो सरकार की प्रशासनिक अकर्मण्यता और काम न करने की नीयत को साफ दर्शाता है। दिल्ली की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है और सरकार सिर्फ विज्ञापनों में व्यस्त है।
यह स्थिति तब है जब दिल्ली की जनता को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यमुना की सफाई और कूड़े के प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार की नाकामी साफ दिख रही है। इसके अलावा, पेयजल की आपूर्ति भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जिस पर सरकार को अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
विपक्ष के नेताओं का कहना है कि सरकार को चुनावी घोषणाओं से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने वादों को पूरा करने के लिए एक समय सीमा तय करनी चाहिए और उसके अनुसार काम करना चाहिए।
दिल्ली की जनता को उम्मीद है कि सरकार उनकी बुनियादी सुविधाओं के लिए काम करेगी और उनकी समस्याओं का समाधान करेगी। लेकिन सरकार की वर्तमान नीतियों और कार्यशैली से लगता है कि उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

