मुझे लगता है कि राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब दो शिक्षक शिलोंग लोकसभा के लिए चुनाव लड़ रहे हों। हाल के समय में मुझे यही एक मामला याद आता है जहां दो शिक्षक इस सीट के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। इस उपचुनाव की आवश्यकता तब आई जब रिकी सिंगकॉन के अचानक निधन के कारण हुई थी।
इस उपचुनाव में दो शिक्षकों के बीच का प्रतिद्वंद्विता एक अनोखा मामला है। दोनों उम्मीदवारों के पास शिक्षा के क्षेत्र में अपना अनुभव है और वे दोनों ही अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करने का वादा कर रहे हैं।
इस उपचुनाव का नतीजा देखने के लिए लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों उम्मीदवारों के बीच का प्रतिद्वंद्विता कैसे निकलेगा।