नई दिल्ली। परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक विवादों और शिक्षा व्यवस्था में कथित खामियों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके का आरोप है कि NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। संगठन का कहना है कि इन घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय को लेनी चाहिए।

दिल्ली से शुरू हुआ आंदोलन, कई शहरों तक पहुंचा

CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर से आंदोलन की शुरुआत की थी। इसके बाद पुणे, लखनऊ, अमृतसर, जयपुर और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए या उनकी घोषणा की गई। संगठन का दावा है कि छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।

लखनऊ के इको गार्डन में हुए प्रदर्शन में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।

CJP की मुख्य मांगें क्या हैं?

संगठन का कहना है कि हाल के वर्षों में कई परीक्षा विवादों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। CJP ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, जवाबदेही तय करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। इसी के साथ संगठन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

20 जून को बड़े प्रदर्शन की चेतावनी

अभिजीत दीपके ने कहा है कि यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं या सरकार उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है, तो 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। संगठन ने इसे युवाओं की जवाबदेही की लड़ाई बताया है।

सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया?

इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्रालय की ओर से CJP की मांगों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि सरकार पहले भी परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए विभिन्न कदम उठाने की बात कह चुकी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन युवा मतदाताओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों की चिंताओं को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाने की कोशिश है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अभियान कितना व्यापक जनसमर्थन हासिल कर पाता है और सरकार इसकी मांगों पर क्या रुख अपनाती है।