नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विकास दर और महंगाई के बीच संतुलन बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में चल रहा सैन्य संघर्ष है। युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक मार्गों और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है, जिससे आर्थिक अनिश्चितता गहराती जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने कई देशों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित किया है। ऊर्जा लागत बढ़ने से उत्पादन और परिवहन खर्च में वृद्धि हुई है, जिसका सीधा असर महंगाई पर पड़ रहा है। दूसरी ओर, बढ़ती लागत और अनिश्चित माहौल के कारण निवेश और आर्थिक गतिविधियों की गति धीमी पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक विकास दर पर और अधिक दबाव पड़ सकता है। कई देशों के केंद्रीय बैंक पहले से ही महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध की स्थिति में सुधार और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल होने से ही वैश्विक बाजारों में भरोसा लौट सकेगा तथा विकास और महंगाई के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी।