उज्जैन में कथित जमीन सौदों को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। विपक्ष (कांग्रेस) ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे "महाकाल की जमीन की लूट" करार दिया है और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के मास्टरप्लान की घोषणा से ठीक पहले कुछ खास इलाकों में जमीनों की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त की गई।

वहीं, बीजेपी और प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों ने मोर्चा संभालते हुए इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और "सीएम की छवि खराब करने का सुनियोजित षड्यंत्र" बताया है। बीजेपी के नेताओं ने सीएम मोहन यादव का बचाव करते हुए कहा कि विपक्षी दल अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए इस तरह के आरोप लगा रहे हैं।

इस मामले में बीजेपी ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपने गिरेबान में झांकें और अपने नेताओं के कारनामों को देखें। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "विपक्षी दल हमेशा से ही राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे मुद्दों को उठाते रहे हैं, लेकिन इस बार वे अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारेंगे।"

उज्जैन जमीन सौदे का मामला अब मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं, जबकि बीजेपी ने अपने नेताओं का बचाव करते हुए विपक्ष पर हमला बोला है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आगे क्या होता है और कौन सा पक्ष अपनी बात मनाने में सफल होता है।