तमिलनाडु की बुजुर्ग आबादी भारत के अन्य प्रमुख राज्यों से तेजी से बढ़ रही है। यह एक ऐसी समस्या है जिसका सामना तमिलनाडु सरकार को करना पड़ रहा है। तमिलनाडु सरकार के व्हाइट पेपर के अनुसार, तमिलनाडु की बुजुर्ग आबादी 2021 में 10.5% थी, जो 2011 में 8.6% से बढ़कर है। यह आंकड़ा भारत के अन्य प्रमुख राज्यों से तेजी से बढ़ रहा है।

तमिलनाडु की बुजुर्ग आबादी बढ़ने के कई कारण हैं। एक प्रमुख कारण है गिरती जन्म दर। तमिलनाडु की जन्म दर 2021 में 1.7 थी, जो 2011 में 2.1 से घटकर है। यह आंकड़ा भारत के अन्य प्रमुख राज्यों से कम है।

तमिलनाडु की बुजुर्ग आबादी बढ़ने से अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ सकता है। तमिलनाडु सरकार के व्हाइट पेपर के अनुसार, तमिलनाडु की बुजुर्ग आबादी बढ़ने से पेंशन लागत बढ़ सकती है। तमिलनाडु में वर्तमान में लगभग 1.5 मिलियन लोगों को पेंशन मिलती है, जो 2021 में 2.5 मिलियन हो सकती है। यह आंकड़ा भारत के अन्य प्रमुख राज्यों से अधिक है।