चित्तूर में आम की फसल काटने की मौसम की अंतिम अवस्था में पहुंच जाने के बावजूद, किसानों को अभी तक केंद्र सरकार की मदद का लाभ नहीं मिला है। आम की कीमतें गिरने के बावजूद, पल्प प्रसंस्करण इकाइयां आमों की कीमत ₹6 प्रति किलोग्राम से कम में खरीद रही हैं।
किसानों को लगता है कि सरकार की मदद के बावजूद, आम की कीमतें गिरने का कोई कारण नहीं है। आम की फसल काटने के लिए किसानों ने बहुत मेहनत की है, लेकिन अब उन्हें अपने आमों को कम कीमत पर बेचना पड़ रहा है।
किसानों की समस्या को देखते हुए, सरकार को आम की कीमतों को स्थिर करने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है। आम की फसल काटने के लिए किसानों को उचित मूल्य मिलना चाहिए ताकि वे अपने आमों को बेचने के लिए प्रोत्साहित हों।

