सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। वर्तमान में उनकी सेवानिवृत्ति आयु 63 वर्ष है, जबकि निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में यह आयु 70 वर्ष है। इस प्रस्ताव के पीछे का कारण यह है कि सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रोफेसरों की कमी है, जिससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
राज्य के 17 सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में 800 से अधिक प्रोफेसर पदों में से लगभग 200 खाली हैं। यह एक गंभीर समस्या है, जिससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। प्रोफेसरों की कमी के कारण छात्रों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
इस समस्या का समाधान करने के लिए सरकार ने प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। यह प्रस्ताव निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति आयु के समान है। इससे प्रोफेसरों की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।

