सीपीआई(एम) के राज्य सचिव पी शनमुगम ने कहा कि भीड़ हिंसा की जांच चल रही है और मामला अदालत में लंबित है, इसलिए सरकारी नौकरी देने का निर्णय कानूनी प्रक्रिया को कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले जांच पूरी होने देना चाहिए और उसके बाद ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
सीपीआई ने भी सरकार के इस कदम का विरोध किया है। सीपीआई के नेताओं ने कहा कि सरकार को भीड़ हिंसा के पीड़ितों के परिवारों की मदद करनी चाहिए, लेकिन सरकारी नौकरी देना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले जांच पूरी होने देना चाहिए और उसके बाद ही कोई निर्णय लेना चाहिए।
इस मामले में सरकार का कहना है कि वह भीड़ हिंसा के पीड़ितों के परिवारों की मदद करना चाहती है। सरकार ने कहा है कि वह पीड़ितों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने के लिए तैयार है, लेकिन सीपीआई और सीपीआई(एम) ने इसका विरोध किया है।
