एनडीए शासित राज्यों ने शिक्षा अधिष्ठान बिल में केंद्र सरकार की शक्तियों के बारे में चिंताएं व्यक्त की हैं। आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और मेघालय ने केंद्र सरकार की शक्तियों को सीमित करने के लिए सिफारिशें की हैं। इन राज्यों का कहना है कि बिल के मौजूदा रूप में केंद्र सरकार को बहुत अधिक शक्तियां दी गई हैं जो राज्यों की स्वायत्तता को कम कर सकती हैं।
विश्वविद्यालयों ने भी बिल के खिलाफ अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। वे सुरक्षा के लिए सुरक्षा की मांग करते हैं और संसदीय निगरानी की मांग करते हैं। विश्वविद्यालयों का कहना है कि बिल के मौजूदा रूप में केंद्र सरकार को बहुत अधिक शक्तियां दी गई हैं जो विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कम कर सकती हैं।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने भी बिल के खिलाफ अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। बीएचयू के कुलपति ने कहा है कि बिल के मौजूदा रूप में केंद्र सरकार को बहुत अधिक शक्तियां दी गई हैं जो विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कम कर सकती हैं। उन्होंने कहा है कि बिल को संशोधित किया जाना चाहिए ताकि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को संरक्षित किया जा सके।

