असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को एक पत्र में AIUDF ने यह मांग की है कि वास्तविक नागरिकों को रोकने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया बंद की जाए। AIUDF के नेता बादरुद्दीन अजमल ने कहा है कि यह प्रक्रिया असम के नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा है कि यह प्रक्रिया असम के नागरिकों को उनके मूल निवास से वंचित करने का एक तरीका है।

AIUDF ने यह भी मांग की है कि समान नागरिक संहिता को रद्द किया जाए। उन्होंने कहा है कि यह संहिता असम के नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा है कि यह संहिता असम के नागरिकों को उनके धर्म और संस्कृति के अधिकार से वंचित करने का एक तरीका है।

AIUDF ने यह भी मांग की है कि पुनर्वास के लिए परिवारों को शरण दी जाए जिन्हें निष्कासन अभियानों के दौरान विस्थापित किया गया था। उन्होंने कहा है कि यह परिवारों को उनके अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा है कि यह परिवारों को उनके घर और जमीन से वंचित करने का एक तरीका है।