EU-India FTA से श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा लाभ, प्रतिस्पर्धियों के बराबर होगा भारत: मुख्य वार्ताकार
नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) देश के श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है। भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन ने कहा है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले समान अवसर प्रदान करेगा, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां श्रम आधारित उत्पादन अधिक है।
दर्पण जैन के अनुसार, FTA लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी और शुल्क संबंधी बाधाएं कम होने से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इससे वस्त्र, परिधान, चमड़ा, जूता, समुद्री उत्पाद, कृषि प्रसंस्करण और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि इस समझौते का लाभ केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि विभिन्न राज्यों को भी क्षेत्रवार मिलेगा। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में मौजूद प्रमुख निर्यात उद्योगों को इससे नई संभावनाएं प्राप्त होंगी। इन राज्यों में विनिर्माण, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और समुद्री उत्पादों से जुड़े उद्योगों को यूरोपीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA देश के निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। श्रम-प्रधान क्षेत्रों में मांग बढ़ने से लाखों लोगों के लिए नए रोजगार अवसर पैदा हो सकते हैं।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA पर लंबे समय से बातचीत जारी है। दोनों पक्ष व्यापार, निवेश, सेवाओं और बाजार पहुंच से जुड़े कई मुद्दों पर सहमति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। यदि समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौतों में से एक माना जाएगा।
व्यापार जगत का मानना है कि FTA से भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और देश के निर्यात लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। वहीं सरकार इसे ‘मेक इन इंडिया’ और निर्यात-आधारित विकास रणनीति को मजबूती देने वाला कदम मान रही है।