SBI की बड़ी लापरवाही: ₹1 लाख मुआवजा देने का आदेश | Kashyap Sandesh
चंडीगढ़

SBI की बड़ी लापरवाही पड़ी भारी: लोन चुकाने के बाद भी EMI काटने की कोशिश, उपभोक्ता आयोग ने ठोका ₹1 लाख मुआवजा

R. C. Nishad · 13 जून 2026

चंडीगढ़। कार लोन पूरी तरह चुकाने और बैंक से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) प्राप्त करने के बावजूद एक व्यक्ति को बार-बार EMI कटौती की परेशानी झेलनी पड़ी। आखिरकार जिला उपभोक्ता आयोग ने इस मामले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को सेवा में कमी और लापरवाही का दोषी मानते हुए पीड़ित ग्राहक को ₹1 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है।

मामला पंजाब के 57 वर्षीय संजीव कुमार नैय्यर से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2021 में SBI से ₹2 लाख का कार लोन लिया था। उन्होंने नियमित रूप से EMI का भुगतान किया और नवंबर 2025 में पूरा बकाया चुकाकर लोन खाता बंद करा दिया। बैंक ने उन्हें विधिवत NOC और लोन क्लोजर सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया था।

लोन बंद, फिर भी EMI वसूली की कोशिश

शिकायत के अनुसार, लोन खाता बंद होने के बाद भी बैंक ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में EMI वसूलने की कोशिश की। ग्राहक की आपत्ति के बाद बैंक ने राशि वापस कर दी और गलती दोबारा न होने का आश्वासन दिया।

लेकिन मामला यहीं नहीं रुका।

20 जनवरी 2026 को बैंक ने एक बार फिर NACH (National Automated Clearing House) के माध्यम से EMI काटने का प्रयास किया। इस बार खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण ट्रांजैक्शन असफल हो गया और ग्राहक पर ₹590 का बाउंस चार्ज लगा दिया गया।

CIBIL स्कोर खराब होने का भी डर

संजीव कुमार का कहना था कि बैंक की गलती के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा। उन्हें लगातार यह चिंता सताती रही कि कहीं इस गलत रिकवरी प्रयास का असर उनके CIBIL स्कोर पर न पड़ जाए।

उन्होंने फरवरी 2026 में बैंक को कानूनी नोटिस भेजकर शुल्क वापसी और मुआवजे की मांग की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

आयोग ने SBI को ठहराया दोषी

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष जगदीश्वर कुमार चोपड़ा और सदस्य मनदीप कौर की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि लोन बंद होने के बाद बार-बार NACH मांडेट प्रस्तुत करना बैंक की स्पष्ट लापरवाही और सेवा में कमी को दर्शाता है।

आयोग ने कहा कि बैंक की इस कार्रवाई से ग्राहक को आर्थिक नुकसान, मानसिक पीड़ा, असुविधा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

₹1 लाख मुआवजा और ₹590 वापस करने का आदेश

उपभोक्ता आयोग ने SBI को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को ₹1 लाख मुआवजा दे और ₹590 का गलत तरीके से वसूला गया बाउंस चार्ज भी वापस करे।

इसके साथ ही आयोग ने बैंक को यह भी निर्देश दिया कि यदि ग्राहक के CIBIL रिकॉर्ड पर इस घटना का कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ा है तो उसे तुरंत ठीक किया जाए।

ग्राहकों के लिए बड़ा संदेश

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उन लाखों बैंक ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है जो लोन चुकाने के बाद भी बैंकिंग त्रुटियों का सामना करते हैं। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि यदि बैंक की लापरवाही से ग्राहक को आर्थिक या मानसिक नुकसान होता है, तो वह उपभोक्ता मंच के माध्यम से न्याय प्राप्त कर सकता है।

यह मामला इस बात की भी याद दिलाता है कि लोन चुकाने के बाद ग्राहकों को NOC, लोन क्लोजर लेटर और बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित रखना चाहिए ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में उनके पास आवश्यक दस्तावेज मौजूद हों।

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